Thursday, June 29, 2017

बरसात दो दोहे

माटी की सोंधी महक, फैली नीम सुगंध
पहली इस बौछार का , छंदों सा आनंद !!
पानी बरसा मेघ से , मिटा ताप संताप
चादर हरी लपेट ली , धरती ने चुपचाप !!
ओंम प्रकाश नौटियाल

Tuesday, June 27, 2017

बरसात

हर्षित हो कर कह रही , इस मौसम बरसात
धरती ने पानी पिया , बिन पूछे घन जात ।
-ओंम प्रकाश नौटियाल

लंदन उड़ा विमान !

थोड़ा से उस कर्ज का ,कर न सका भुगतान
थैलों मे जिसने लिया ,  लंदन उड़ा विमान !
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Sunday, June 25, 2017

पोषक

कृषक लटकता वृक्ष पर , फंदा गरदन डाल
सबका जो पोषक  रहा, पेट सका ना पाल !
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Sunday, June 18, 2017

नाविक जब गुमराह !

बाईस गज की नदिया , समझ सके ना थाह
नैय्या कैसे पार हो , नाविक जब गुमराह !
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Thursday, June 8, 2017

भानु भट्टी

भानु भट्टी भभक रही ,तपे धरा बेभाव  
जले भुने जो विगत से , उन पर कहाँ प्रभाव ?
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Monday, June 5, 2017

मोटी खाल !!

दौरा कर देहात का , नेता थे बेहाल
सूरज तपा अलाव सा, उस पर मोटी खाल !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल