Saturday, May 26, 2018

युग प्रणेता

लायें अच्छे अंक जो, हो उन पर अभिमान
असफल छात्रों का मगर , करें नहीं अपमान
करें नहीं अपमान, सभी कल नेता होंगें
थाम देश की डोर ,युग के प्रणेता होंगें
कहें ’ओंम’ कविराय , इन्हें भी गले लगायें
भविष्य का कर ध्यान , जो अधिक अंक न लायें !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Wednesday, May 16, 2018

हीरे


सेवक अपने देश के, हीरे हैं बेजोड़
बिकने पर जो आ गये,मूल्य है सौ करोड़ !!!
-ओंम प्रकाश नौटियाल 

Sunday, May 13, 2018

विश्व मातृ दिवस

   माता तेरी छाँव में , सुन्दर यह संसार
   ढूंढे से मिलता नहीं, ऐसा निश्छल प्यार,
   ऐसा निश्छल प्यार, कहूं क्या तेरी माया
   पा आँचल की छाँव,, पड़े न दुःख का साया,
   ना जानू  प्रभु  ठौर, बसे हैं कहाँ विधाता
   मेरी तो आराध्य और भगवन तुम माता !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Wednesday, May 9, 2018

ठाठ से है जी !!

ज़ैड़ सुरक्षा चाहिए
जिनका सदन सोने का
नींद उनकी उडती है
जिन्हे डर है खोने का
वह बोतल से पीते हैं
यहाँ जल घाट का है जी
हम तो आम जनता हैं
शरीर काठ का है जी
दर्द तनिक नहीं होता
गुजरती ठाठ से है जी !!
-ओम प्रकाश नौटियाल

Thursday, May 3, 2018

उपयोगी हथियार !!

राजनीति की द्दष्टि से, समझो भ्रष्टाचार
मूर्ख बनाने का हमें, उपयोगी हथियार !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल

जनमत का त्यौहार

जब देश मे कहीं मने ,जनमत का त्यौहार
वादों की लगती झड़ी, जुमलों की भरमार,
जुमलों की भरमार ,जो कि जन जन मन भायें
सम्मोहित हों लोग, नयी उम्मीद लगायें
कहें ’ओंम’ कविराय ,रुकेगा शायद यह तब
देंगे सुनना छोड़ , चुनावी भाषण सब जब !!
-ओंम प्रकाश  नौटियाल

Tuesday, May 1, 2018

इस्पात करके देख


इस्पात करके देख    -ओंम प्रकाश नौटियाल
गीतिका
जो कह रहा वो पूरी कभी बात करके देख             
दुश्मन की तरह सामने से घात करके देख                       

अच्छा नहीं हर वक्त य़ूं जज्बात में बहना             
इरादों को तू भी कभी इस्पात करके देख              

जरूरी है मिलते रहें , नेह, स्नेह की खातिर            
शहर को अपने तू कभी देहात करके देख              

अच्छा नही फूट डालना निज स्वार्थ के मारे            
पी कर बुराई स्वयं को  सुकरात करके देख            

देश के शत्रुओं को न  कोई हमदर्दी  मिले             
दुष्टों के जुल्म पे जरा जुल्मात करके देख             
-ओंम प्रकाश नौटियाल, बड़ौदा , मोबा.9427345810

फुटपाथ पर पैदा हुआ


फुटपाथ पर पैदा हुआ-ओंम प्रकाश नौटियाल
गीतिका
फुटपाथ पर मुर्झाया वह फुटपाथ पर खिला,            
न शिकवा किसी से न गरीबी का कोई गिला           

पैदा हुआ और  फिर वो बस जवान हो गया,           
इस  छलाँग में लेकिन उसे बचपन नही मिला।         

जवानी के पुराने कपडे यूं रास आ गये,               
चिपके रहे जब तक रहा साँसों का सिलसिला।          

राज मार्ग क्यों कर भला फ़ुटपाथ तलक आते          
उसका जग फुटपाथ था और वही रहा  किला।          

भारत चमक रहा,  उसे गर्मी में लगता था,            
तिलमिलाता सूरज मगर करता था पिलपिला।          

आजाद भारत में उसे नहीं आशियाँ मिला              
                        फुटपाथ ही था देश वह वहाँ से नहीं हिला ।
-ओंम प्रकाश नौटियाल, बड़ौदा , मोबा.9427345810

कर नाटक


मजदूर दिवस

सत्ता में भागी बने, भारत का मजदूर
स्वेद कण तब दमकेंगे, स्वर्ण समान जरूर !
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Friday, April 27, 2018

तेरा गगन मेरा गगन-

तेरा गगन मेरा गगन-ओंम प्रकाश नौटियाल

कितना उदास आज है
तेरा गगन मेरा गगन
खगों से भी विरान है
तेरा गगन मेरा गगन

नीरवता के शोर में
है मन अजब बेचैन सा
सिसकी की भेंट चढ गया
तेरा अमन मेरा अमन

पुष्पित कभी जहाँ हुए
प्रेम के महके सुमन
कैसे हुआ उजाड़ अब
तेरा चमन मेरा चमन

लिखे जो प्रेम गीत थे
दिल के रक्तिम रंग से
बदरंग उनको कर गया
तेरा वहम मेरा वहम

मुँह पर न अब हँसी रही
शत शूल में फँसी रही
दोनों के लब सिल गया
तेरा अहम मेरा अहम

देखा किये विस्तृत नभ
नीम तले इक छोर से
नीम ही कर गया अलग
तेरा सहन मेरा सहन

-ओंम प्रकाश नौटियाल, बड़ौदा , मोबा.9427345810

मै शापित

मै शापित -ओंम प्रकाश नौटियाल

मुड़कर जब जब देखा मैंने
हत्यारे मेरे पीछे थे
मेरे भ्रूण  हत्या को आतुर
क्रोधित हो मुट्ठियाँ भींचे थे

जब थोडी बडी हो गई मैं
तुतलाकर लगी बोलने कुछ
वो कह कह बेटी पुचकारें
भीतर पिशाच सरीखे थे

तरुणाई ने अँगडाई ली
पाया सब ओर भेडिए थे
भक्षण को मेरे लालायित
वह अकसर मुझको खींचे थे

विवाहोत्तर भी अभिशप्ता
दुखित सदैव विक्षिप्ता
अनुरागी आचरण से मेरे
मानों सब अंखियाँ मीचे थे

आँचल से स्नेह उंडेला था
तानों को ही बस झेला था
उस आँचल को  जला दिया
सींचे जिसने प्रेम बगीचे थे
-ओंम प्रकाश नौटियाल, बड़ौदा , मोबा.9427345810

Thursday, April 26, 2018

आशीर्वाद

आशीर्वाद -ओंम प्रकाश नौटियाल
(अखिल भारतीय डा. कुमुद टिक्कू कहानी प्रतियोगिता के लिये 6/11/2017 को sahityasamarth@gmail.com को प्रेषित )
पंडित त्रिभुवन जुयाल का एक ही पुत्र था-विनोद । पंड़ित जी अध्यापक रहे , अब सेवा निवृत हैं । उनका पुत्र विनोद हैदराबाद की एक आई टी कम्पनी में कार्यरत है ।  पंडित जी पहाडों से उतर कर यहां कैसे आ बसे , इस विषय में वह बताते हैं कि उनके पिता देहरादून में सर्वे आफ इन्डिया में थे और बाद में स्थानन्तरित होकर हैदराबाद पहुंच गए ।पंड़ित जी को साँस की पुरानी बीमारी थी  पर हैदराबाद की जलवायु उनके लिए बेहद माकूल रही और वह यहाँ इस बीमारी से काफी हद तक निजात पा गए। शुरू शुरू में परेशान शाकाहारी पंड़ित जी ने हैदराबादी मछली वाला इलाज भी किया और समय के साथ काबू में आती बीमारी से उन्हें यह विश्वास हो गया की सब मछली की करामात है । पर एक बार उन्हें जब लम्बे समय के लिए सर्दियों में देहरा दून जाना पड़ा तब उनको वहाँ इस बीमारी ने फिर गिरफ्त में ले लिया । हैदराबाद आकर वह कुछ दिनों मे काफी हद तक ठीक हो गए । उसके बाद भारी मन से उन्होंने देहरादून परिवार जनॊं के साथ बसने का विचार त्याग कर साथियों के सुझाव पर वहीं बंजारा हिल्स के पास कुछ जमीन लेकर तीन चार साल में छोटा दो मंजिला मकान बना लिया । तब तक वह सेवा निवृत भी हो चुके थे । आज तो यह जगह हैदराबाद के पोश इलाकों मे से है ।विनोद की शादी भी उन्होंने यहीं से की पर बहू उनकी अपनी बिरादरी की थी -उत्तरकाशी से ।विनोदकी एक ही संतान थी -यामिनी ।
समय धीरे धीरे बीतता गया । विनोद तो पढ़ने मे औसत ही रहा था पर यामिनी बड़ी कुशाग्र थी ।सीबीऐसई से 12 वीं करने के बाद उसका जेईई आईआईटी में 552वाँ रैंक आया और उसे चेन्नई आईआईटी में दाखिला  मिल गया। पंडित जी के पिता जी तो खैर कभी के स्वर्ग वासी हो चुके थे वह स्वयं भी बुढ़ापे में प्रवेश कर चुके थे ।यामिनी से उन्हें बेहद प्यार था । एक वही थी जिसे दादा जी के पास बैठकर उनसे उनके बचपन और जवानी के किस्सों को सुनने मे मजा आता था । अपनी भी हर बात वह दादा जी को  सुनाती थी । अब उसके चेन्नई चले जाने से उनकी जिंदगी उदास सी हो गई थी  हाँ यामिनी शनिवार के दिन नियम से फोन पर दादा जी से लम्बी बात करती थी । दादा जी को भी शनिवार रात्रि साढ़े नौ बजे का इंतजार रहता था ।विनोद तॊ वैसे ही कम बोलते थे फिर उनकॆ पास समय का भी अभाव रहता था। यामिनी की माँ तो घर कार्य में व्यस्त रह्ती थी वैसे वह भी बोलने मे कंजूस थी । पर नेक हॄदय और सच्ची महिला थी ।
दादा जी को आज यामिनी की फिर बहुत याद आ रही थी । कल ही तो उसने लम्बी बात की थी । जब वह यहाँ होती थी तो अकसर जिद करती थी ,’दादा जी करीम चाचा वाला किस्सा सुनाओ न? ’ दादा जी न जाने कितनी बर वह किस्सा सुना सुना कर थक चुके थे पर यामिनी की जिद वह टाल नहीं सकते थे उसे न जाने इसमें क्या मजा आता था } अकसर सुनती थी और उसकी कोई सहेली आ जाए तो उसे भी सुनवाती थी } दादा जी कुछ शर्माकर हल्की सी मुस्कराहट के साथ शुरु हो जाते थे ।
" करींम मेरा हम उम्र ही रहा होगा ।आज तो इस दुनियाँ मे नहीं है ’ इतना कहकर दादा जी की आँखे नम हो गई । ’खैर जहाँ भी हो खुश रहे,उस वक्त हम लोग टिहरी मे थे मैं सातवीं या आठवी में रहा हुंगा ।करीम ने स्कूल छोड़ दिया था। घर के करोबार में पिता की मदद करने लगा था ।अब करोबार भी क्या था ? गली गली रूई पिनने और रजाई भरने की फेरी लगाते थे । गाँव में  उसके दोस्त कम थे पर मुझे वह बड़ा अच्छा लगता था } जिंदा दिल इंसान था ।उसे भी मेरा साथ पसंद था और कभी फुरसत के वक्त मेरे पास आ जाता था उसका कमाल अंग्रेजी बोलने में था ।‘उसे अंग्रेजी का A भी नहीं आता था ,पर धारा प्रवाह उट पटाँग अंग्रेजी ऐसे लहजे में बोलता था कि एक बार को तो अंग्रेज भी चकरा जाएं और उसमें कुछ अर्थ ढूंढ़ने की नाकाम कोशिश करने लगें । दादा जी जब उसकी नकल करते थे तो अंदाज हो जाता था कि मूल स्वरूप यानि करीम चाचा वाला कै्सा रहा होगा । यामिनी जाने क्यों सुनकर लोट पोट हो जाती थी। दादा जी सुना सुना कर उब जाते थे पर यामिनी की जिद के सामन विवश हो जाते थे। एक आध बार उन्होंने यामिनी को प्यार से समझाया भी," बॆटा तुम्हे इस किस्से में मजा आता होगा पर औरों को क्यों बोर करती हो ?" पर यामिनी कहाँ मानने वाली थी।दादा जी ने  एक  सुझाव भी दिया, "बेटा तू अपने मोबाइल पर इसका विडियो बना ले , फिर जब चाहे सुनती रह और सुनाती रह ।"
दादा जी के सुझाव पर कुछ विशेष उत्साहित न होकर यामिनी ने विडियो तो बना लिया, पर देखने के बाद बोली ," दादा जी आप कैमरे के आगे कुछ नरवस हो गए, उतना मजा नहीं आया। अब आप जब सामने होगे तब तो मैं आप से ही सुनुगी, हाँ आपकी अनुपस्थिति में इसका उपयोग अर लिया करूंगी ।दादा जी समझ गए कि पीछा छुडाना मुश्किल है ।अतः चुप हो गए ।
विनोद कुछ गंभीर किस्म का बापनुमा आदमी था ,जो अपनी मान्यता अनुसार छॊटों को ज्यादा मुँह नहीं लगाता था ।यामिनी की दादी थी नहीं ,माँ अकसर गृहकार्यों मे व्यस्त रहती थी अधिक पढ़ी लिखी नहीं थी ।यामिनी की माँ से तो बस काम  की ही बातें होती थी ।गप मारना माँ के स्वभाव में नहीं था। यामिनी को यह गुण शायद दादा जी से विरासत में मिला । खूब छनती थी जब दोनों मिलते थे घन्टों बातों का सिलसिला चलता था । हैदराबाद मे यामिनी की एक दो प्रिय सहेली थी । पढ़ती तो वह भी  हैदराबाद के बाहर ही थी पर छुट्टिया अकसर साथ हो जाती थी । किसी सहेली के होने पर दादा जी से गप का समय कुछ घट जाता था जो उन्हें कतई नहीं भाता था ।
इस बार छठे सैमेस्टर की समाप्ति पर यामिनी जब हैदराबाद आई तो कुछ बदली बदली सी थी । दादा जी के सामने भी कुच असहज सी पेश आ रही थी मानो किसी तनाव में हो ।दादा जी को लगा कि सब कुछ शायद सामान्य नही है , उसने अब तक करीम चाचा वाला प्रसंग सुनाने की फरमाईश भी नही की । दादा जी ने एक दिन उसे पास बैठ कर पूछ ही लिया,"यामिनी बेटा , मुझे लग रहा है तुम कुछ तनाव में हो। शायद कुछ कहना चाहती हॊ पर कह नही पा रही हो । कोई बात है तो निःसंकोच बोल दो ।"सुनते ही यामिनी को मानो जीवन दान मिल गया हो। कुछ संयत होकर बोली ।
"आप ठीक कह रहे हो दादा जी।सोचकर आई थी कि घर पहुंचते ही सबसे पहले आप को बता दूंगी । पर हिम्मत ही नहीं हुई। पापा को भनक लगेगी तो शायद मुझ्रे खा ही न जाएं ।"
"कोई लड़का पसंद कर लिया है क्या?" दादा जी ने पूछ लिया। यामिनी कुछ और नारमल होते हुए तपाक से बोली " दादाजी , आपकी इस बात से तो मुझे फ़िल्म ’जब वी मैट ’ के दादाजी का डायलाग याद आ गया जब वह कहते है कि ’हमारी उम्र में यह सब ताड़ने में देर नहीं लगती’ । आप ठीक कह रहे हैं ।"
" अरे , सचमुच ! यह तो गंभीर विषय है। तेरी जिंदगी का सवाल है। कौन लड़का है? कहाँ रहता है? तेरे कौलेज का ही है न ? क्या कर   रहा है? फोटो है तेरे पास? सब कुछ बता न  विस्तार से।"
"दादा जी सबकुछ बताऊंगी ,पर आप पापा को संभाल लेना प्लीज "
"  अरे पहले मुझे तो कुछ पता  चले"
"दादा जी, वह भी चैन्नई आई आई टी मे है । होशियार है उसका JEE में 252  वा रैंक था ।लम्बा है , स्मार्ट है पर बड़ा सिंपल । घर उसका त्रिवेन्द्रम में है, अब जो  तिरुवनंतपुरम कहलाता है।
" त्रिवेन्द्रम में ?’ दा्दा जी चौंक पड़े । "यानि केरल से है? नाम क्या है ?
"उसका नाम है मोहन थौमस ।"  यामिनी  ने थौमस पर कुछ जोर डालकर बताया जिससे बात पहले ही साफ हो जाए।
"यह तो क्रिश्चियन नाम है। मैं इसमें अपनी क्या राय दूंगा ? विनोद तो भडक जाएगा। "
" दादा जी...ई...ई...ई प्लीईईज ।ऐसा मत कहिए। सब कुछ आपके हाथ में है  । आप ही पापा को समझा सकते हैं "
" मैं तो खुद कुछ नहीं समझा तो उसे कैसे समझाउंगा। नहीं , नहीं , इस काम के लिए तो तू मुझे बख्श ही दे ।"
"दादा जी अगर मैं उसे आप से मिलवा दूं तब तो आप अपनी राय देंगे न? या फिर धर्म, जात पात ही हावी रहेगी आपके उपर ।"
"इतना ही कह सकता हूं कि अगर मैं उससे मिलता हूं तो उसके बारे में मैं अपनी राय मैं केवल उसके गुणों के आधार पर बनाऊंगा। पर  तुम कब और कैसे मिलवा सकोगी उससे?"
"परसों मिलवा सकती हूं दादा जी । वह भी छुट्टियों में त्रिवेन्द्रम में है । एक दिन उसे तैयारी में लगेगा । परसॊं शाम तक आ्पसे मिलने आ जाएगा ।वह अपने माँ बाप का इकलौता लड़का है । उसके पापा का बिजनैस है काजू एक्सपोर्ट करते हैं, चाहते हैं वह अब बिजनैस देखे  । उसकी शादी भी जल्दी करना चाहते हैं उसके पीछे पडे है। बडॆ दबाव में है ।इसीलिए वह भी पहले हमारे परिवार का रुख देखकर यहाँ की स्वीकॄति चाहता है जिससे सबकुछ पटरी पर आ जाए और वह तनावमुक्त हो सके। मुझे यकीन है वह परसों जरूर आ पाएगा। बाकी तो मुझे कुछ नही कहना है आप परखियेगा"
"ठीक है ठीक है ।" दादा जी ने कहा " "लगता है तुमने ही पटकथा लिखी है, विनोद और अपनी माँ को क्या बताओगी कि कौन आया है?"
"आप उसकी चिंता न करें दादा जी, वह सब तो मैं संभाल लूंगी।आपको तो बस उसे शत प्रतिशत अंक देकर पास करना है।" यामिनी हंसकर बोली।
दादा जी बोले, " बेटा , सिफारिश इसमें बिल्कुल नहीं चलेगी । फकत योग्यता के आधार पर फैसला होगा।"
"मुझे आपकी पारखी नज़र पर भरोसा है ,दादा जी।पापा अम्मा को तो कह दूंगी मेरी सहेली का भाई आ रहा है। सहेली ने कुछ नोट्स भिजवाए हैं ।एक आध घंटा बैठकर अपने दोस्त के यहाँ चला जाएगा।" यामिनी  बोलते हुए कुछ उत्साहित सी लगी।
" ठीक है तुम उससे बात करके सब तय करो।" दादा जी ने कहा ।
यामिनी को लगा कि उसने पहला कदम तो सही ले लिया है।कुछ रिलैक्स होकर वह सीधे अपने कमरे में आई और मोहन को फोन करने लगी ।
" येस यामिनी , हाउ आर यू ? " उधर से मोहन की आवाज आई।
"ठीक ही हूं " यामिनी ने उत्तर दिया।
"’ही’ मीन्स ?"मोहन ने सवाल किया।
" अब मुझे तो तुमने इतना मुश्किल काम सौंप दिया और खुद छुट्टियों का मजा ले रहे हो । अच्छा सुनो ,मैंने दादा जी को तुम्हारे बारे में बता दिया है। क्या तुम कल आ सकते हो दादा जी से मिलने, वह तुमसे मिलना चाहते हैं ।"‘
" कल तो नहीं , परसों शाम को तुम्हारे घर पहुंच सकता हूं । तुम घर का पूरा पता , लैन्ड मार्क्स के साथ व्हाट्स एप कर देना। ठीक है न ?" मोहन ने कहा।
यामिनी के मन की बात हो गई थी । वह तो परसों का ही चाह रही थी । "ठीक है । पता वगैरह तो मैं सब विस्तार से बता ही दूंगी ।पर एक बात सुनो , दादा जी के अतिरिक्त अभी तुम्हारी असलियत  अन्य किसी को पता नहीं चलनी चाहिए। मै पापा,अम्मा से कह दूंगी कि  सहेली का भाई आ रहा है । उसने कुछ नोट्स भिजवाए हैं । ठीक न?"
"अब वह सब तुम जानो। मुझे तो बस ओर्डर मानना है " मोहन की आवाज आई ।

" तो परसों शाम पक्का 06.30 बजे, दादा जी को इमप्रैस करने की तैय्यारी करके आना ।" यामिनी ने चकते हुए हिदायत दी
" अरे ,जब तुम्हे कर दिया । तो बुढऊ सारी ,सारी, दादा जी क्या चीज हैं ।" मोहन ने चुटकी ली ।
"अच्छा ज्यादा उड़ो मत , व्हाट्स एप पर अपना प्रोग्राम और मूवमैन्ट्स बताते रहना । बाय "
और फिर यामिनी उछलती हुई दादा जी के कमरे की तरफ भागी ।
"दादा जी मोहन परसों शाम आ रहा है । अब इतनी दूर से आ रहा है आप खयाल रखना ।" यामिनी ने दादा जी से अनुनय के लहजे मे कहा ।
" मुझे अपना काम पता है बेटा, तुम बाकी चीजें संभालो ।" दादा जी बोले ।

आज बुधवार है । मोहन को आना है ।आज ड्राईग रुम की साफ सफाई यामिनी कामवाली बाई से अपनी देख रेख में करवा रही है } पर सावधान भी है कि उसका यह उत्साह माँ न पढ ले । विनोद तो खैर आफिस जा चुका है ।
अम्मा ने अभी आकर उसे बताया कि तेरे पापा को शाम को खँडूरी जी के लड़के की शादी में जाना है ।
यामिनी को लगा कि सब कुछ अपने आप ही ठीक हो रहा है । दिन शुभ है ।
"  अम्मा खन्डूरी अंकल आन्टी हम लोगों को कितना मानते हैं पिछले साल दादा जी की बीमारी के दौरान अंकल ने कितने चक्कर लगाए थे और दौड़ भाग की थी ।पापा अकेले क्यॊं जा रहे हैं ? आप को भी जाना चाहिए ।"
" अरे मैं जाकर क्या करूंगी । घर का काम बिखर जाता है सारा । फिर शाम को तेरी सहेली का भाई भी आ रहा है ।"
"अरे वह कौन सा अफलातून है । मै चाय बनाकर पिला दूंगी । थोड़ी देर ही तो बैठेगा । अम्मा आप अवश्य जाइए ।आप किसी रिश्ते को अहमियत क्यों नहीं देती ।इतने अच्छे लोग हैं ,बिरादरी के हैं । हमारा कितना खयाल रखते हैं । आप को बस जाना ही है ।" यामिनी बोली । बिरादरी वाली बात कहकर वह खुद ही सकुचा गई ।
" अरे बेटी, रिश्तों को खूब अहमियत दूंगी । जरा हो तो जाए तेरा रिश्ता ।" अम्मा ने कहा।
यामिनी सुनकर कुछ सिहर सी गई । कहीं अम्मा को कुच भनक तो नहीं लग गई ।
फिर सहज होकर अधिकार के स्वर में बोली," और अम्मा , वह हरी वाली साडी पहनना।"
"ठीक है देखती हूं अब तो तूने मेरा श्रॄंगार भी कर दिया है ।"
यामिनी अपनी योजना पर मन ही मन बहुत खुश थी । अपने कमरे में जाकर तुरंत मोहन से संपर्क किया और कहा, " मोहन तुम मेरा संदेश मिलने पर ही आना । शाम के सात बजे के आसपास।"
"ठीक है ,मुझे भी यही टाइम सूट करता है।" वह बोला ।
शाम को जब यामिनी के अम्मा पापा तैय्यार हो गए तो उसने मोह्न को आने का संदेश दिया। मोहन पहले ही हैदराबाद के होटल पहुंच गया था और तरोताजा होकर यामिनी के संदेश की प्रतीक्षा कर रहा था।
इधर यामिनी के अम्मा पाप शादी के लिए घर से निकले और उधर घर के बाहर मोहन की टैक्सी आकर रूकी ।घर में दादा जी और यामिनी के अतिरिक्त अब कोई नहीं था ।यामिनी ने उसे ड्राइंग रुम मे बैठाया और हाल चाल जानने के बाद दादा जी को उसके आने की सूचना दी ।
दादा जी धीरे धीरे ड्राईंग रूम में आए और मोहन को देखते ही क्षण भर को हर्षमिश्रित आश्चर्य के साथ ठिठक से गए । उन्होंने अपने मन में मलयाली लड़के की जो छवि संजोई थी उससे हटकर उनके सामने एक गोरा छरहरे बदन का सुन्दर लड़का था, जो उन्हें देखते ही खड़ा हो गया और उनके चरणों  मे झुक गया ।उसकी हाईट भी छः फ़ीट से शायद एक आध इंच ही कम होगी ।
दादा जी ने मोहन से मुखातिब होकर कहा ,’उम्मीद है तुम आराम से यहाँ पहुंच गए हो , घर ढूंढ़ने में कोई परेशानी तो नहीं हुई न ?"
"जी नही दादा जी ,यामिनी ने ठीक से गाइड़ कर दिया था।"
"वह तो मुझे पता था। खैर, अब हम बिना तकल्लुफ किए और समय को बरबाद न करते हुए सीधे काम की बात पर आ जाते हैं । मुझे पता चला है कि तुम लोग एक दूसरे को पसंद करते हो। पहले तो मै तुमसे यह जानना चाहता हूं कि तुमने यामिनी में ऐसा क्या देखा?"
मोहन ने दादा जी के इस प्रश्न पर चेहरे पर बिना कोई विशेष भाव लाए हुए संयत स्वर में उत्तर दिया," दादा जी मुझे उसका सबसे मीठे स्वर में बात करना और मित्रवत स्वभाव बहुत पसंद आया , दूसरे दुखियों और बेसहारों की समस्याओं के प्रति वह बेहद संवेदनशील है । जिसकी मैं सराहना करता हूं और पक्षधर भी हूं ।और हाँ सबसे बड़ी बात जिसने मुझे उसके इन गुणों को जानने और परखने की जरूरत महसूस करवाई वह है उसके व्यक्तित्व का आकर्षण । आपसे क्षमा चाहता हूं पर मेरे खयाल से इन सभी बातों ने मुझे बहुत प्रभावित किया है ।"
" तुम्हारी हिंदी इतनी अच्छी कैसे है? खैर यह तो मैं तुमसे बाद में पूछूंगा । पहले यह बताओ कि कल्चर में अंतर होने के कारण क्या तुम सोचते हो कि यामिनी का पूरे परिवार में एड्जटमैन्ट संभव है ? इस बात पर तुमने विचार किया है कभी ?" दादा जी ने पूछा।
" दादा जी  इन सब विषयों पर मैंने बहुत गहराई से विचार किया है । हमारा काजू एक्स्पोर्ट का बिजनैस है ।पिताजी इस सिलसिले में बहुत से लोगों के संपर्क में आते हैं । इसलिए वह बिल्कुल खुले है इस मामले में ।और उन्होने शादी के बारे में भी पसंद वगैरह का काम मुझ पर छोड़ दिया है।
"मेरी दोनों बुआओं कि शादी भी उत्तर भारतीयों में हुई है जो दिल्ली में पढाई के दौरान उनकॆ संपर्क में आई ।मैं बचपन में बड़ी बुआ के पास दो साल दिल्ली रहकर पढ़ा भी हूं । अकसर छुट्टियों में लम्बे समय के लिए दिल्ली जाना होता रहा है । मेरी अच्छी हिंदी में दिल्ली, बुआ,   फूफा,और उनके परिवार जनों का बड़ा हाथ है ।बुआओं ने वहाँ बडी अच्छी तरह एड्जस्ट किया हुआ है ।पिताजी हमेशा कहते हैं अगर इंसान का स्वभाव अच्छा है संवेदनशील है तो उसके लिए कहीं भी एडजस्ट कर पाना कोई मुश्किल नही है । मैं इकलौता लड़का हूं , शादी करने का दबाव है । इसीलिए मैंने इस बारे में सभी पहलुओं से सोचने का प्रयास किया है ।आप लोगों की सहमति आवश्यक है जिससे मैं घर में अपनी पसंद बता सकूं ।" मोहन ने विस्तार से अपनी बात रखने की कोशिश की ।
दादा जी ध्यान से उसकी बात सुन रहे थे एक एक शब्द तोल रहे थे।’ और हाँ, एक बात बताओ बेटा , शादी के बारे में तुम्हारे परिवार के क्या विचार है ? कब, कहाँ और कै्सी शादी चाहते हैं?"
"दादा जी , अभी तो मैंने उन्हे अपनी पसंद बताई नहीं थी । वह लोग रोज ही एक दो प्रस्तावों पर मेरी राय माँग लेते हैं ।कितु मैं यह कह सकता हूं कि पसंद बताते ही वह तुरंत शादी करना चाहेंगे । मैं शादी को एक साल और यानि फाइनल वर्ष तक टालने का प्रयास कर सकता हूं । पता नहीं वह लोग मानेंगे कि नहीं?"
"अरे यामिनी चाय वगैरह तो ले आओ"
"जी दादा जी" कहकर यामिनी उठ्कर चली गई।
"हाँ मोहन तुम अपनी बात पूरी कर लो ।" दादाजी बोले।
"जी दादा जी ,जैसा कि आप जानते ही होंगे शादी वहीं पर हमारे पारिवारिक चर्च में होगी ।उसके बाद आप भी अपनी रीति के अनुसार वहाँ अथवा यहाँ शादी की रस्म कर सकते हैं ।"
" अरे बेटा , हम शायद बहुत आगे बढ़ गए हैं , अभी तो मुझे इसके अम्मा, पापा से बात करनी होगी।"
"ठीक है दादा जी, मुझे भरोसा है आप सबकुछ सुलझा लेंगे।"
कुछ देर में यामिनी चाय लेकर आ गई । चाय के साथ घर परिवार और पढ़ाई अदि के विषय में बातें चलती रही ।
चाय पीकर मोहन ने जाने की इजाजत ली ।"
" ठीक है मैं तुम्हे और नहीं रोकूंगा। इसके अम्मा पापा भी आने वाले होंगे । उनसे तो तुम्हे तभी मिलवाएंगे जब मैं उन्हे सब बातें पहले बता दूंगा।"
’अच्छा दादा जी ,आशा है आप मुझे A+ ग्रेड देंगे और आगे के लिए भी यह केस अपने हाथों में ले लेंगे।"
दादा जी उसकी बात पर मुस्कराए और यामिनी से बोले,"जा बेटी, बाहर तक छोड़ दे ।"
यामिनी और मोहन बाहर टैक्सी की तरफ जा ही रहे थे कि पापा और अम्मा आ गए सामने से।"
" अरे आप लोग तो बड़ी जल्दी आ गए। और हाँ यह मेरी सहेली का भाई है।" फिर मोहन से बोली "मेरे अम्मा पापा हैं ।"
अम्मा बोली ,"जा रहे हो क्या ? "
"जी हाँ अब चलता हूं । देर हो रही है ।"
यामिनी मन ही मन खुश थी कि चलो अम्मा पापा ने भी देख लिया ।
मोहन को  विदा कर यामिनी सीधे दादा जी के कमरे में गई और दादा जी के कान में फुसफुसाई ,"दादा जी अपनी राय बताइये न ।"
"सच कहूं , मैंने जैसा सोचा था उससे कई गुना अच्छा लगा । 100 में से 200 अंक तो बनते हैं, भला लडका है, सुन्दर और समझदार है ,बिल्कुल तुम्हारी जोड़ी का है।"
"ओह दादा जी आप कितने अच्छे हैं ।"
" पर अब विनोद को संभालने की चिंता है ।" दादा जी बोले।
" वह तो आप कर ही लोगे दादा जी , बाप हो आप पापा के, पर आप आज बात मत करना ,दो तीन दिन बाद करना ।" यामिनी ने सुझाया।
" इतनी जल्दी भला क्यों करूंगा ? " दादा जी बोले।

 दादा जी की आशा के विपरीत विनोद को मनाने में कोई विशेष दिक्कत नहीं हुई थी । दादा जी ने विनोद से कहा था," लड़का मैंने देखा है, उससे बातचीत की है। सुन्दर,सौम्य , सुशील है ।पढ़ने में भी हमारी यामिनी से कम होशियार नहीं है। अकेला लडका है पिता का जमा जमाया बिजनैस है । फिर सबसे अच्छी बात यह है कि वह विदेश बसने में बिल्कुल इच्छुक  नहीं है ।अंततः उसे पिता का बिजनैस ही संभालना है। मेरे  खयाल से जाति धर्म की बात अगर भूल जाएं तो इससे अच्छा रिश्ता नहीं मिलेगा ।तुम अच्छी तरह विचार कर लो। और हाँ एक बात और,खुशी खुशी आशीर्वाद दोगे तो अच्छा है , वरन अगर ब्च्चों ने शादी की सोच ही ली है तो व्यर्थ की नाराजगी और ऐंठ से कोई लाभ नहीं है । बच्चे बहुत समझदार हैं , भला बुरा समझते हैं ।"
दादा जी की बातों पर विनोद ने संजीदगी से गौर किया । उसे अपनी बेटी के चयन और पिताजी की सूक्ष्म द्दष्टि पर पूरा भरोसा था अतः उसने अपनी सहर्ष स्वीकृति दे दी ।यामिनी की अम्मा को क्रिश्चियन वाली बात थोड़ी अखरी थी पर अंततः उसे भी ससुर, पति और बेटी के साथ चलने में ही भलाई दिखाई दी ।मोहन के परिवार के साथ बातचीत के बाद तय हुआ कि फाइनल सैशन की समाप्ति के बाद 21 जून को यानि लगभग 4 महीने के बाद त्रिवेन्द्रम के  चर्च में पहले शादी होगी फिर 23 जून को वहीं किसी वैडिंग पौइन्ट पर पर हिंदू रीति के अनुसार शादी की सभी रस्में होंगी , वहाँ तो गिनती के आदमी ही जा पाएंगे , अतः हैदराबाद में 25 जून को रिसैप्शन दिया जाएगा ।
धीरे धीरे एक वर्ष का समय व्यतीत हो गया यामिनी के फाइनल सैशन की समाप्ति अब चंद सप्ताह के फासले पर थी। उसके बाद जून मे त्रिवेन्द्रम में यामिनी की शादी थी ।
दादा जी लगभग 86 वर्ष के हो गए थे, पहले से काफी कमजोर हो गए थे।
यामिनी फाइनल परीक्षा देकर आ चुकी थी । शादी की खरीदारी शुरू हो गई थी। समय बीतता जा रहा था ।अंततः जून भी आ गया । 20 जून को यामिनी , दादा जी उसके अम्मा पापा, दोनों बुवाएं व उनका परिवार साथ में विनोद के दो घनिष्ठ मित्रों का काफिला त्रिवेन्द्रम पहुंच गया ।
मोहन के माता पिता ने शहर के एक प्रतिष्ठित पाँच सि्तारा होटल में उनके ठहरने का प्रबंध किया था और उन्हे स्पष्ट कर दिया था कि वह लोग उनके मेहमान है अतः यहाँ के प्रवास के खर्च के बारे मे उन्हे सोचना भी नही है न मन मे किसी प्रकार का बोझ रखना है ।बड़ी विचित्र सी स्थिति मे थे वह लोग , बारातियों जैसी आवभगत हो रही थी ।21 जून को सुबह 10 बजे उन्हे पास के ऐन्ड्रुज चर्च में ले जाया गया और क्रिश्चियन विधि से पादरी ने शादी संपन्न करवाई । 22 जून को मोह्न के माता पिता ने उन सबको तथा अपने सभी रिश्तेदारों को रिसैप्शन पर बुलाया था ।
23 जून को पास ही के एक वैडींग पाईन्ट पोइन्ट पर हिंदू पद्धति से शादी संपन्न हुई जिसमें मोहन की ओर से उनके सभी रिश्तेदारों ने यमिनी
के पिताजी के विशेष अनुरोध पर भाग लिया ।वैसे वह सभी इ्सके लिए बहुत उत्सुक और उत्साहित लग रहे थे । दादा जी  इसके बाद अवश्य थके थके और निढाल से लग रहे थे ।खाँसी भी थी।
24जून को मोहन समेत सभी हैदराबाद लौट आए ।25को वहाँ रिसैप्शन है । मोहन के माता पिता  तो विशेष अतिथि थे ही ।किंतु उन्होने  25 जून को ही शाम को हैदराबाद आने का कार्यक्रम बनाया था।
दादा जी और  टीम को हैदराबाद पहुंचते हुए शाम के लगभग 4 बज गए थे ।
घर आते ही दादा जी को सीने मे बहुत जोर से दर्द उठा। बिना वक्त खोए विनोद उन्हे पास के संजीवनी अस्पताल मे ले गया  । डाक्टर्स ने आई सी यू में तुरंत भरती कर लिया और जाँच शुरु हो गई ।डाक्टर ने उन्हें बताया," दिल का दौरा पडा है । इलाज शुरु कर दिया है इंजैक्शन  दिया है ।48घन्टे के बाद ही हालत के बारे मे कुछ निर्णायक कहा जा  सकता है ।"
उधर घर में यामिनी के आँसू  थम नहीं रहे थे ।उसे लग रहा था जैसे उसने अपनी खुशी के लिए, अपना जीवन संवारने के लिए दादा जी के जीवन को  संकट मे डाल दिया हो ।अगले दिन यामिनी ने जिद की कि वह अस्पताल से दादा जी को रिसैप्शन में लेकर आएगी ,उनका आशीर्वाद लेना है ।
शाम 6 बजे यामिनी अस्पताल पहुंची ।विनोद और मोहन भी साथ थे ।माँ और बुआ जी पहले सॆ ही अस्पताल के लाउन्ज में बैठे हुए थे ।विशेष प्रार्थना पर उसे कुछ देर के लिए ICCU में जाने की अनुमति मिली, वहाँ बोलने की मनाही थी। दादा जी के मुंह नाक पर नलियाँ लगी थी , उसे लगा कि वह वैन्टीलेटर पर हैं ।यामिनी ने जैसे ही उनके हाथ का स्पर्श किया ऐसा लगा मानो उन्होंने उसे पहचान लिया । एक हल्की सी चमक उनकी आँखो मे दिखाई दी , हाथ उठाने का उपक्रम किया , मानो यामिनी को आशीर्वाद देना चाह रहे हों और अगले  ही क्षण निढाल हो गए ।नर्स ने फौरन डाक्टर को बुलाया , उसने जाँच के बाद उन्हे मॄत घोषित कर दिया ।उधर विनोद  के पास फोन पर फोन आरहे थे । सभी दादा जी जी का हाल और उनके अस्पताल से रिसैपशन  में आने का समय जानना चाहते थे ।विनोद अत्यंत दुविधा और असमंजस की स्थिति मे था । तभी मोहन ने विनोद के पास आकर धीमे से कुछ कहने की चेष्टा की ," पापा मैं जानता हूं,आप के लिए और हम सब के लिए यह बहुत कठिन वक्त है , आप कृपया मुझे गलत न समझें, मैं आपसे यह अर्ज करना चाहता हूं कि दादा जी भी यह कभी नही चाहते कि उनके कारण उनकी बेटी इतने लोगों के आशीष से वंचित हो जाए और सब भूखे घर जाएं । मेर विचार है कि हम बाडी को मौर्चरी मे रखवा देते हैं और अभी यह बात हम लोगों के अतिरिक्त और लोगों तक नहीं पहुंचनी चाहिए । आप अ्म्मा जी और बुआ जी को भी समझा दीजिए कि खुद पर काबू रख्खें । दादा जी ने इस कार्य को इस मुकाम तक पहुंचाया है उनका पूरा आशीर्वाद तभी मिलेगा जब रिसैप्शन की रस्म भी संपन्न हो जाए। तभी उनकी आत्मा को शान्ति मिलेगी । आप या मै यहां रुक कर बाडी मौर्चरी मॆं रखवा कर आते हैं } शे्ष लोग तुरंत रिसैप्श्न के लिए रवाना हो जाएं ।  सभी प्रतीक्षारत हैं । अगर देर होगी तो कुछ लोग यहाँ आ सकते हैं ।"
" कहते तो ठीक ही हो बेटा । मैं यहाँ का काम करके आता हूं ।तुम इन सबको ले जाओ । यामिनी को भी संभालना होगा ।तो आप लोग चलो अब ।"
अम्मा , बुआ, यामिनी मोहन शीघ्र ही रिसैपश्न स्थल के लिए रवाना हो गए । रास्ते भर मोहन उनको संयमित रहने के लिए कहता रहा ।" सभी समझदार थे तथा मौके की गंभीरता समझते थे।" सबके चेहरे पर मायूसी के भाव थे । वह रिसैप्शन स्थल पहुंच गए ।वहाँ मोहन के माता पिता बुआएं  आदि सभी त्रिवेन्द्रम से पहुंच  चुके थे तथा वहीं रेसैप्शन पर घर के लोगों की तरह मेहमानों की आवभगत कर रहे थे। यामिनी ने उनके पैर छुए दादा जी के बारे में बात हुई और फ़िर मायूस सा चेहरा लिए यामिनी और मोहन अपने लिए लगी कुर्सियों पर विराज गए ।लोग शगुन  और आशीर्वाद देने के लिए आने शुरू हो गए । विनोद ने अपने निमंत्रण पत्र में उपहार और लिफाफे न लाने का अनुरोध किया था जिस पर कायम रहते हुए यामिनी ने किसी तरह का कोई तोहफा क्षमा याचना के साथ स्वीकार नहीं किया ।लगभग रात्रि 11.30 बजे तक सब लोग घर लौट आए ।
सुबह 7 बजे विनोद और यामिनि के फूफा जी दादा जी का शव लेकर घर आ गए । मोहन के माता पिता भी होटल से घर पहुंच गए थे ,मोहन ने शायद उन्हें सब बता दिया था।अब यह बात सबको पता चल ही चुकी थी । घीरे धीरे लोग आने शुरु हो गए । 10 बजे दादाजी की शव यात्रा  चेतना मोक्षधाम के लिए रवाना हुई ।
यामिनी में ही उनके प्राण बसते थे ।
यामिनी के ससुराल जाने से पूर्व ही  दादा जी विदा ले चुके थे ।

गंगा माँ-चंद दोहे

गंगा माँ-चंद दोहे--ओंम प्रकाश नौटियाल

गंगा माँ करती रही ,  हृदय प्राण संत्राण 
ताप मुक्ति कष्ट निवृति, वर्णित वेद पुराण

शुचिता सारी  चढ रही, लोभ , मोल की भेंट
शोषक के बस स्वार्थ से, पोषक मटियामेट

संसाधन हैं कम नहीं , चाहत पर अवरुद्ध
वर्षो से हम माँ तुझे  ,कर न सके पर शुद्ध

धन व्यय तक सीमित है , गंगा का अभियान
अब तक ना गोचर हुई, क्षणिक तनिक भी जान

संस्कृति के पर्याय हैं , नदी नार औ’ नीर
इनको पहुँचे पीर तो, बात बहुत गंभीर

गंगा से इतिहास है , गंगा से भूगोल
जीवन के हर मूल्य का, इसके जल से तोल

जीव तत्व की  बूंद में , माँ तेरा  है  जोड़
लज्जित हमने कर दिया, गाद कीच की छोड

माँ के तेज प्रताप का, वर्णित है गुणगान
तारण सगर पुत्रों का, कष्ट निवृति निर्वाण
-ओंम प्रकाश नौटियाल, बड़ौदा , मोबा.9427345810

काठ का है जी

काठ का है जी-ओंम प्रकाश नौटियाल

हम तो आम जनता हैं
शरीर काठ का है जी
दर्द तनिक नहीं होता
गुजरती ठाठ से है जी
-1-
वो करेंगे रखवाली
जिनका बदन सोने का
नींद उनकी उडती है
जिन्हे डर है खोने का
वह बोतल से पीते हैं
यहाँ जल घाट का है जी
-2-
बुढापे में वह जवान
मुँह पर क्रीम की पर्तें
बड़ा दमदार हाजमा
वह क्या क्या नहीं चरते
पर अपना तो बचपन भी
शुरू से  साठ का है जी
-3-
उनका धँधा ऐसा है
बस चाँदी बरसती है
हमारी आय देखकर
रोटी भी तरसती है
श्रीमान का पहाड़ा भी
दो दुनी आठ का है जी

हम तो आम जनता हैं
शरीर काठ का है जी
-ओंम प्रकाश नौटियाल, बड़ौदा , मोबा.9427345810

’आशा’

’’आशा’ तो बंदी हुई , हुआ चित्त निष्काम
होली मे अब फिर नहीं ,रंगी होगी शाम !!
-ओम प्रकाश नौटियाल

Wednesday, April 25, 2018

नारी

नारी - ओंम प्रकाश नौटियाल

प्रबल मोह पाश से
स्नेहसिक्त मिठास से
अर्चना उपवास से
सदभावना विश्वास से
निर्मल पावन मन से,
सृष्टि के उदगम से
नारी ने सबको
अपने पास सदा रक्खा है !

कर्म धर्म जाप हो
क्रंदन, प्रलाप हो
दुख हो विलाप हो
किसी का संताप हो
सर्वहारी नारी ने,
पत्नी महतारी ने,
बेटी , बहन प्यारी ने,
जीवन में सबके
विश्वास जगा  रक्खा है,
सृष्टि के प्रारंभ से
अपने पास सदा रक्खा है !

बंधकर कई बंधन में
इस जग प्रांगण में
निष्ठ, शिष्ट आचरण से
द्दढ़ता से प्रण से,
सबके जीवन में
सुवासित सा सुन्दर
पलाश खिला रक्खा है,
नारी ने सदियों से
अपने पास सदा रक्खा है !
-ओम प्रकाश नौटियाल
{पुस्तक "पावन धार गंगा है" से }

Tuesday, April 24, 2018

संस्कार ?

होता है जब भी बलात्कार
मन तड़पे रोये बार बार
दुराचार के पाप कुण्ड़ में
क्या डूब गये सभी संस्कार ?
गुण्ड़ई  नाचती नंगा जी
कैसे कह दें सब चंगा जी !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल


Wednesday, April 18, 2018

वक्त

किस का सदा अच्छा वक्त रहा
यह नरम तो कभी सख्त रहा
कई राजा आये चले गये
संग साथ कभी न तख्त गया
जब वक्त मिले बेरंगा जी
कहते चलिये सब चंगा जी !!
-ओम प्रकाश नौटियाल

सलाह !!

जल्दी जल्दी में अगर , करना पड़े विवाह
कर लें ए टी एम से , जाकर प्रथम सलाह !!
-ओम प्रकाश नौटियाल

Tuesday, April 17, 2018

ए टी एम

सर्दी में ठिठुरें कभी , धूप नहायें लोग
ए टी एम प्रताप से , सीख रहे है योग !
-ओंम प्रकाश नौटियाल

कहते रहिये

खड़ा दूर भविष्य झांक रहा
अपनी किस्मत को आँक रहा,
इस वर्तमान की पीड़ा पर
मोती आँसू के टाँक रहा,
खुश रहने का यह फन्ड़ा जी
कहते रहिये सब चंगा जी  !!
-ओम प्रकाश नौटियाल

Monday, April 16, 2018

सब चंगा जी !!!

क्या कहें देश के बारे में
सब बैठे हैं मन मारे से
था दिया जिन्हे दायित्व सौंप
रख रहे तभी सॆ लारे मॆं
किस किस का फोड़ें भंड़ा जी
कहते रहिये सब चंगा जी !!!
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Wednesday, April 11, 2018

कानून पर यकीन !!

कुकर्मो पर उनके जब ,थी पुलिस  कर्महीन
तब से उनका बढ गया, कानून पर यकीन !!
-ओम प्रकाश नौटियाल

Saturday, April 7, 2018

अब अच्छा नही लगता

हर बात पर बवाल , अब अच्छा नही लगता
रहे देश बदहाल , अब अच्छा नही लगता
चलभाष थाम चलने मे है शान निराली
हो  हाथ में रुमाल,अब अच्छा नही लगता !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Monday, April 2, 2018

बन बैठे सिरमौर !!

छंद छंद में घूम कर , शब्द ढूंढ़ते ठौर
दोहा जब उनको मिला, बन बैठे सिरमौर !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Saturday, March 31, 2018

एप्रिल फूल !!

दिवस आज का मित्रवर , कूल बहुत ही कूल
समझकर अति गर्म इसे, बने न एप्रिल फूल !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Thursday, March 29, 2018

पेपर लीक !!

सब क्षेत्रों की सुरक्षा, चूम रही जब पीक
बोर्ड़ के तब हो गये, दो दो पेपर लीक !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Tuesday, March 27, 2018

दोहे गर्मी के

किरणे दिखलाने लगी , अपना रूप प्रचंड़
मौसम के आदेश पर , हमें दे रही दंड़  !!
 -ओंम प्रकाश नौटियल

Thursday, March 1, 2018

होली

‘प्लेट पकौड़े  संग में, हो गिलास में भंग
रंग होली का कर दे ,पुलकित हर इक अंग !!!

होली मय संसार है , क्या धरती क्या व्योम
रंग लगाने आ रहे  , चुपके छुपके  ’ओम’ !

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Thursday, February 15, 2018

भ्रष्ट

भ्रष्ट बचे ना एक भी, बने देश खुशहाल
ढूंढ़ ढूंढ़ कर भ्रष्ट जन , दो मय माल निकाल !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Sunday, January 21, 2018

डार्विन का सिद्धांत


बंदर रहे बहुत दुखी , बिगड़ गई औलाद
नाच नाच अब दे रहे, नई खोज को दाद !
-ऒंम प्रकाश नौटियाल
 

Monday, January 15, 2018

जनता की फरियाद

सालों तरसे न्याय को, जनता की फरियाद

सुलझे एक दिन में पर, अपने सभी विवाद !

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Sunday, January 14, 2018

पतंग !

धरती पर लड़ती भला, किस किस से वह जंग

बैठ डोर पर उड़ चली , नभ की ओर पतंग !

-ओम प्रकाश नौटियाल

Friday, January 12, 2018

, न्याय

जनता के हर दर्द का, जिसके पास उपाय
दुखियों के सम्मुख वही, न्याय माँगता न्याय !

जिनको हम समझे सदा, दुख का मात्र उपाय
जनता के सम्मुख वही, न्याय माँगता न्याय !
-ओम प्रकाश नौटियाल
 

Tuesday, January 9, 2018

विश्व हिंदी दिवस

विश्व हिंदी दिवस की बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं !!
-
विश्व हिंदी दिवस मने , दस को पहले मास
यही ध्येय कि हिंदी हो , जग में भाषा खास
भाषा जब अपनी नहीं , फिर कैसे स्वाधीन
निज भाषा को प्यार कर, हुआ कौन कब हीन !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Thursday, January 4, 2018

दुख का अंत !!

दीन हीन का हाल यही , बस जीवन पर्यंत

बड़ा कष्ट आकर करे, छोटे दुख का अंत !!

-ओम प्रकाश नौटियाल

Wednesday, January 3, 2018

रोकी उसकी राह !

नव वर्ष मे पहले ही दिन , बाधित प्रेम प्रवाह

द्वंद द्वेष की आग ने, रोकी उसकी राह !

-ओम प्रकाश नौटियाल

Saturday, December 30, 2017

अलविदा २०१७

बंदी देखी मंदी देखी

उन्हें सुना बघारते शेखी

गत वर्ष रहा रीता रीता

दिन अच्छे तलाशते बीता

मिला कदम कदम अचंभा जी

बाकी तो सब कुछ चंगा जी !

-ओंम प्रकाश नौटियाल

-नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

Wednesday, December 27, 2017

चंगा जी !

जिनकी चाहत बस ताली हो
जिह्वा उगले पर गाली हो
हर ओर है यह चिंता व्याप्त
क्या वही चमन का माली हो
क्या दिल्ली क्या दरभंगा जी
बाकी तो सब कुछ चंगा जी !
-ओम प्रकाश नौटियाल

Monday, December 25, 2017

कुछ सत्ता आसक्त !

भारत में भरपूर हैं ,भाँति भाँति के भक्त
क्रूर कराल कठोर कटु, कुछ कमसिन कमशक्त,
धर्म ध्वजी ध्याता ध्यानी धुनी धुरंधर कुछ
पूजक कुछ परमेष्ट के, कुछ सत्ता आसक्त !
-ओम प्रकाश नौटियाल
(पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित)

Wednesday, December 20, 2017

सोने चला विकास !

बहुत भाग दौड़ कर ली, बाँधी सबको आस
चूर चूर थक कर हुआ, सोने चला विकास !
ओंम प्रकाश नौटियाल

विकास

सभी उसको बुला रहे , दुविधा मध्य विकास
इक अकेली जान भला, किस के जाये पास !
ओंम प्रकाश नौटियाल

देश

हर किसी की चाह यही, बदले वह यह देश
अन्य किसी भी काम मे, ध्यान नहीं है लेश !
ओंम प्रकाश नौटियाल

Tuesday, December 19, 2017

लोग रहे अब

प्रमुख सब दलों के लिये , अच्छे यह परिणाम
एक्जिट पोल खूब  गिरे ,मुंह के बल धड़ाम !
-
एक्जिट पोल फेल हुए, अच्छा यह संकेत
इसका केवल अर्थ यह, लोग रहे अब चेत !
ओंम प्रकाश नौटियाल
(पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित )

Thursday, December 14, 2017

एक्जिट पोल

एक्जिट पोल खत्म करे, मतगणना आनंद
अंत कथा का जानना , पहले किसे पसंद ?
ओंम प्रकाश नौटियाल

Wednesday, December 13, 2017

धरती पर नहीं पाँव !

रहा घूमता नगर में, गया विकास न गाँव

प्लेन बना जल में खड़ा, धरती पर नहीं पाँव !

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Tuesday, December 12, 2017

भोर की बात !

जिस नेता के पक्ष में, लड़े मित्र से रात ,
वह जा मिला विपक्ष में, अभी भोर की बात !
ओंम प्रकाश नौटियाल
(सर्वाधिकार सुरक्षित )

Sunday, December 10, 2017

शुद्ध हवा

हिमाचल की शुद्ध हवा ,साँस नहीं आसान
शीघ्र आउट हो तभी, चले छोड़ मैदान !

नगर के क्रिकेटर भला , लेते कैसे साँस
हिमाचल की शुद्ध हवा, आई उन्हें न रास !

आदत थी प्रदूषण की , हवा मिल गयी शुद्ध
छोड़ चले मैदान को, हुए क्रिकेटर  क्रुद्ध !
ओंम प्रकाश नौटियाल

Saturday, December 9, 2017

चुनावी खर्च

पैसा कितना हो गया , इस चुनाव में खर्च
गूगल भी ना कर सकी, अब तक इसको सर्च,
अब तक इसको सर्च, इस धन का स्त्रोत क्या था ?
काला अथवा श्वेत , पैसे का गोत्र क्या था ?
कहें ’ओंम ’ कविराय , दानी कौन है ऐसा ?
शीघ्र ही सूद संग,  वसूले   जो ना   पैसा !!
 -ओंम प्रकाश नौटियाल
( सर्वाधिकार सुरक्षित )

बेदाग औ’ सच्चे !!!



सच्चे सेवक की सुनो,एक यही पहचान

सत्ता पा संयत रहे, डिगे नहीं ईमान

डिगे नहीं ईमान, ना अहं का दास बने

जनजन को दे मान, उन्ही का बस खास बने

कहें ’ओंम’ कविराय, दिन आ सकेंगे अच्छे

लडेंगे जब चुनाव, बस बेदाग औ’ सच्चे !!!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

बेदाग औ’ सच्चे !!!


सच्चे सेवक की सुनो,एक यही पहचान

सत्ता पा संयत रहे, डिगे नहीं ईमान

डिगे नहीं ईमान, ना अहं का दास बने

जनजन को दे मान, उन्ही का बस खास बने

कहें ’ओंम’ कविराय, दिन आ सकेंगे अच्छे

लडेंगे जब चुनाव, बस बेदाग औ’ सच्चे !!!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

खिले हमेशा धूप !!

मित्रों सच्चे मीत की ,एक यही पहचान

पा सत्ता संयत रहे, डिगे नहीं ईमान

सच ही सच्चा मित्र है , ना बदले जो रूप

चलें यदि इसी राह पर, खिले हमेशा धूप !!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

-

(पूर्व प्रकाशित - सर्वाधिकार सुरक्षित )

Friday, December 8, 2017

फैशन में गाली है

हर चीज में मिलावट सबकुछ ही जाली हैं

सियासत में आजकल फैशन में गाली है,

दिन में जिसे दिखाये हमेशा स्वप्न सुनहरे

उस जनता की नींदें अब सपनों से खाली हैं

-ओंम प्रकाश नौटियाल

( सर्वाधिकार सुरक्षित )

Wednesday, December 6, 2017

गुजारिश

भ्रष्ट कार्यो में जितने भी बहन भाई हैं लिप्त,
कृपया कुछ दिनों की खातिर कर दें स्थगित,
सी बी आई के पास है अधिक काम का बोझ,
नोच खसोट रोक कर जरा उनकी भी हो सोच।
-ओंम  प्रकाश नौटियाल
(पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित )

Monday, December 4, 2017

अलविदा प्रिय शशि कपूर जी !!

प्यार के मौसम में, उत्सव कन्यादान

प्रेम कहानी कलयुगी , धर्मपुत्र की शान ,

क्रोधी वक्त कभी कभी, ढह देता दीवार

शशि सम जो चमका रहा, छोड़ चला उस पार !!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Saturday, December 2, 2017

नेतन बन भगवान

आये उनके द्वार पर, नेतन बन भगवान
रोनी सूरत दुख सुने ,मुफ्त दिया वरदान
मुफ्त दिया वरदान, बिन जी एस टी वाला
माँग लिया बस वोट, रंग में अपने  ढाला
कहें "ओंम" कविराय , ढेर वादे भी लाये
करो दुआ वह दीन, न फिर झाँसे में आये !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल


(सर्वाधिकार सुरक्षित  )

Thursday, November 30, 2017

प्याज

परत परत का तन लिये,खाये ऊँचा भाव
क्यों ना प्याज विचारता, सर पर खड़ा चुनाव !
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Friday, November 24, 2017

पुत्र प्रमाद

सेवक पुत्र प्रमाद में, ऐसे हुए अधीर

टिकट उसे जब ना मिला, दिया कलेजा चीर !

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Tuesday, November 21, 2017

धन पाना हो लक्ष्य

धन पाना हो लक्ष्य जब ,रहे, मिटे तब साख

निष्प्राण के दाम लगे ,अश्रु औ’ कई लाख !!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Monday, November 20, 2017

ट्‍वीट !

सर्दी के प्रारंभ में , पैदा हो कुछ हीट

उल्टी सीधी सोच को , कर दें जल्दी ट्‍वीट !

-ओंम प्रकाश नौटियाल

पाठ व्हाट्‍स एप का

झूठा सच्चा जो मिले, अर्जित कर लो ज्ञान

हो पाठ व्हाट्‍स एप का, बनो शीघ्र विद्वान !!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Saturday, November 18, 2017

मूड़ी जी ने कह दिया

मूड़ी जी ने कह दिया, हुआ मूड़ अब ठीक

अर्थ व्यवस्था स्वस्थ है, बंद हुई सब लीक !!

-ऒंम प्रकाश नौटियाल

Friday, November 17, 2017

मूड़ी रेटिंग

वित्त आंकड़ों से रही, साँसत में यह साँस

मूड़ी की रेटिंग से ,फिर बंधी है आस !

-ऒंम प्रकाश नौटियाल

पूजा कीजे ईश की

गलती सबसे हो सके,कौन यहाँ भगवान?

पूजा कीजे ईश की, मानब का सम्मान !

ओंम प्रकाश नौटियाल

Thursday, November 16, 2017

कठिन सबेर !

काला धन, काला धुँआ, काला मन अंधेर

काला पर कानून हो , तो फिर कठिन सबेर !

-ऒंम प्रकाश नौटियाल

Wednesday, November 15, 2017

स्वतंत्र चिंतन

अच्छे काम सराहिये ,हो बुरों का विरोध

स्वतंत्र चिंतन के करें, दूर सभी अवरोध!!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Monday, November 13, 2017

ट्रांसफर

सच्चाई जल्दी पहुँचे , हर कार्यालय द्वार

सत्यनिष्ठ की कीजिए ,बदली बारम्बार !!

ओंम प्रकाश नौटियाल

मस्त !

सांसद ,मंत्री अन्य सब,हैं चुनाव में व्यस्त

देश उसी तरह चल रहा,सुस्त,पस्त पर मस्त !

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Sunday, November 12, 2017

शुद्ध हवा

"पतंजलि की शुद्ध हवा," यह भी हो उत्पाद

शीघ्र सभी को प्राप्त हो, प्रभु से यह फरियाद !!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Saturday, November 11, 2017

दुखी सब बादल

बादल सोचे देखकर , घना धरा का फाग

कौन घूमता है वहाँ , रचकर मेरा स्वाँग ?

रचकर मेरा स्वाँग ?, कुछ मैं देख ना पाऊँ

लगे सभी तो स्याम, किधर पानी बरसाऊँ

सभी छुप गये खेत, रहा मैं जिनका कायल

देख धरा का हाल , अत्यंत दुखी सब बादल

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Friday, November 10, 2017

हवा

बच्चों का बचाव करें, खुद भी बचें जनाब

जमाने की न लग सके, ऐसी हवा खराब !

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Wednesday, November 8, 2017

एकता सूत्र

वायु बहुत विषाक्त हुई , दिल्ली से लाहौर
विष एकता सूत्र बना , आया कैसा दौर !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल

कालाधन

हारे यदि इस बार तो, फिर पाओगे तख्त

पर जाकर आता नहीं , कालाधन औ’ वक्त !!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Tuesday, November 7, 2017

सच्चे मुद्दे

जात,पाँत,हिंदु,मुस्लिम, पर मत धरिए ध्यान

शिक्षा, रोटी,वस्त्र, छत, सच्चे मुद्दे मान !!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

हिलता तख्त !!!

नेताओं के पास भी, कितना खाली वक्त

रैली,भाषण माँगता , उनका हिलता तख्त !!!

-ओंम प्रकाश नौतियाल

Monday, November 6, 2017

रोड़ शो

मार्ग राज्यों  के सभी ,थे अब  तक  बेजोड़
रोड़ शो से बिगड़ गये,सह न सके वह लोड़ !
-ओंम प्रकाश नौटियाल

सभा, रोड़ शो, रैलियाँ

सभा, रोड़ शो, रैलियाँ , जायें करें प्रचार

वैसे भी बेकार हैं, समय खूब है यार ?

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Friday, November 3, 2017

, जन सेवा

लाभ पद पर अगर नहीं , होता कहीं चुनाव

पैदा होना कठिन है , जन सेवा का चाव !

-ओंम प्रकाश नौटियाल

गैस

गुस्सा तनिक न कीजिए ,न ही खाइए तैश

प्रकृति ही जब बढना है, क्योंकर बढे न गैस !

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Wednesday, November 1, 2017

जिंदगी

वय बढ़ी मतदान किया,, और सुनी तकरीर

भूख ,प्यास की मार से. फिर तज दिया शरीर !

-ऒंम प्रकाश नौटियाल

Sunday, October 29, 2017

, होगा देश महान !

व्हाट्‍स एप नित्य जितना , बाँट रहा है ज्ञान

दूर नहीं वह दिवस जब , होगा देश महान
-ऒंम प्रकाश नौटियाल

Friday, October 27, 2017

कौन बनेगा करोड़़ पति ?

बन सके वह करोड़पति ,जिसका ज्ञान विशिष्ट

या फिर घूस पचा सके, हो मृदु भाषी, शिष्ट !

-ओंम प्रकाश नौटियाल

लोकतंत्र

लोकतंत्र के मायने, उनकी हो सरकार

बलशाली नेता रहें, जिनके रिश्तेदार !

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Thursday, October 26, 2017

पुश्तैनी घर

सभी इमारत का मुझे ,रटा हुआ इतिहास

पुश्तैनी घर पर बना ,किन पूर्वजों प्रयास?

-ओंम प्रकाश नौटियाल

वादा तेरा वादा

सत्त्ता चाहे लक्ष्य पर , धर सेवक अवतार

ऐसे वादे कीजिए , मुँह से टपके लार !!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Tuesday, October 24, 2017

ब्लाइँड़ खेल

ब्लाइँड़ खेल प्रकाश में, धन खोया अनमोल

जीवन की बाजी सदा, खेल आँख को खोल !

- ओंम प्रकाश नौटियाल

भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार करना यदि, पूरी तरह समाप्त

खबरें इसकी बंद हों , होगा यह पर्याप्त

होगा, यह पर्याप्त, यदि कोई नहीं माने

करे जेल की सैर ,सजा वह पक्की जाने

सब लोग करें ध्यान, बरतें यह शिष्टाचार

लिखें , पढ़ें ना लेख , लिए शब्द भ्रष्टाचार !!!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Saturday, October 21, 2017

छुट्टी पर अखबार

वड़ोदरा में आज भी, छुट्टी पर अखबार

नाश्ता फिर अब कीजिए,लेकर संग अचार !!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

आई थी दीवाली

आई थी दीवाली और फिर आकर चली गई

नकली रोशनी से आस का अब भ्रम नहीं होता,

पंछी तो आज भी गगन मे निर्भीक उड़ते हैं

किसी दल का लहराता वहाँ परचम नही होता !!!!!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Friday, October 20, 2017

गोवर्धन पूजा

पर्वत पूजन का बने,यह भी एक विकल्प

पर्यावरण वहाँ बचे, करें आज संकल्प !!

-ओम प्रकाश नौटियाल

Wednesday, October 18, 2017

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !!!!

लीजे दिया कुम्हार से, बड़ी दुकानें त्याग

श्रम का जब दीपक जले,जगमग चमके भाग!!

ओंम प्रकाश नौटियाल

Tuesday, October 17, 2017

धन तेरस की हार्दिक शुभकामनाएं !!!

वैसे तो हर ब्रांड़ की ,चाय सभी को भाय,

जि एस ’टी’ के स्वाद पर ,क्या है लेकिन राय ?

-ओंम प्रकाश नौटियाल

Saturday, October 14, 2017

चुनाव

सब दलों की चिंता यह , आते पास चुनाव

देखें अब की मिल सके, वादों का क्या भाव !!

-ओंम प्रकाश नौटियाल

आज फिर एक अत्यंत दुःखद समाचार मिला !ॐ शान्ति शान्ति !!!! 14.10.2017

क्रूर काल के फिर चले, असमय ही विष दंत

एक जागृत जीवन का, हाय किया रे अंत !!

ओंम प्रकाश नौटियाल