Saturday, August 20, 2011

अन्ना हजारे

-ओंम प्रकाश नौटियाल

कोई तो है तडपता जो
हमारे दर्द के मारे,
कोई तो है अजीज़ अपना
जिसे हम जान से प्यारे ।

कोई तो है जिसे गम
सुना सकते हैं हम सारे,
कोई तो है बनाया जिसने
हम को आँख के तारे ।

कोई तो है नहीं जिसके
आँसू मगरमच्छी ,
कोई तो है नहीं भाते जिसे
बस खोखले नारे।

कोई तो है समझता जो
हमारी जान की कीमत,
कोई तो औषधि बनकर के
आया आज है द्वारे।

कोई तो है हमारी साँस
जिसकी साँस बसती है,
हृदय पवित्र , हमदर्द मित्र
हमारा अन्ना हजारे !!!

(पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित)

4 comments:

  1. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 22-08-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  2. कोई तो है नहीं जिसके
    आँसू मगरमच्छी ,
    कोई तो है नहीं भाते जिसे
    बस खोखले नारे।

    pure dil se likhi bhavnaon me bahati man ko choo lene wali kavita..apne blog pe nimantran aaur badhayee ke sath

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  3. कोई तो है जिसे गम
    सुना सकते हैं हम सारे,
    कोई तो है बनाया जिसने
    हम को आँख के तारे ।
    ..सच कोई न कोई अपना हो तो उससे दिल की बात आसानी से कह लेता है हर कोई....
    बढ़िया उम्मीद जगाती रचना..
    नयी सुबह कभी न कभी आएगी, ऐसा हम भी मानते है..
    आपको बढ़िया रचना और जन्माष्टमी की सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें ..

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  4. बहुत ही सारगर्भित लेख जन्माष्टमी के अवसर पर शायद अन्ना ही नए अवतार हैं ऐसा लग रहा है ,जनसमूह का समर्थन औए सहयोग और विस्वास जैसा उनको मिल रहा है बस सबकी कोशिश और मेहनत से इस देश का कुछ उद्धार हो जाए बस यही कामना है / शानदार अभिब्यक्ति के लिए बधाई आपको /जन्माष्टमी की आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं /
    आप ब्लोगर्स मीट वीकली (५) के मंच पर आयें /और अपने विचारों से हमें अवगत कराएं /आप हिंदी की सेवा इसी तरह करते रहें यही कामना है /प्रत्येक सोमवार को होने वाले
    " http://hbfint.blogspot.com/2011/08/5-happy-janmashtami-happy-ramazan.html"ब्लोगर्स मीट वीकली मैं आप सादर आमंत्रित हैं /आभार

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