Friday, March 6, 2015
Thursday, March 5, 2015
Wednesday, March 4, 2015
Saturday, February 28, 2015
Friday, February 20, 2015
महत्वपूर्ण सावधानियाँ - कुर्सी के संबंध में
जब भी आप कुछ देर के लिए कुर्सी छोड कर या अस्थायी तौर पर किसी अन्य को सौंप कर कहीं जाते हैं तो उस पर अपना नाम कढा हुआ रुमाल अवश्य रख दीजिए ताकि कुर्सी पर आपका अधिकार सुरक्षित रहे ।
भावावेश में आकर या ईमानदारी के जूनून में बहकर कुर्सी छोडने की भूल कभी न करें । लोग आपके इस कृत्य का न केवल अतिशय दुष्प्रचार करेंगे बल्कि आपको भगौडा जैसे विशेषणों से सुसज्जित कर यह सुनिश्चित करेंगे कि आपका यह कार्य अन्य किसी के कुर्सी प्रेम को तिरस्कृत करने के लिए उदाहरण न बन सके ।
कुर्सी आपको जीवन रूपी मंझधार से पार लगाने का अचूक वाहन है । इसके खेवनहार स्वयं बनिए और इसके लिए किसी अन्य माँझी पर भूल कर भी भरोसा मत की कीजिए ।
-ओंम प्रकाश नौटियाल , बडौदा , मोबा. 9427345810
भावावेश में आकर या ईमानदारी के जूनून में बहकर कुर्सी छोडने की भूल कभी न करें । लोग आपके इस कृत्य का न केवल अतिशय दुष्प्रचार करेंगे बल्कि आपको भगौडा जैसे विशेषणों से सुसज्जित कर यह सुनिश्चित करेंगे कि आपका यह कार्य अन्य किसी के कुर्सी प्रेम को तिरस्कृत करने के लिए उदाहरण न बन सके ।
कुर्सी आपको जीवन रूपी मंझधार से पार लगाने का अचूक वाहन है । इसके खेवनहार स्वयं बनिए और इसके लिए किसी अन्य माँझी पर भूल कर भी भरोसा मत की कीजिए ।
-ओंम प्रकाश नौटियाल , बडौदा , मोबा. 9427345810
Wednesday, February 11, 2015
Sunday, February 8, 2015
मोदी जी मेरे सपने में
-ओंम प्रकाश नौटियाल
आज सुबह के वक्त स्वप्न में प्रधान मंत्री मोदी जी से मुलाकात हो गई । मोदी जी ने भी मानों मुझे एकदम पहचान लिया और देखते ही बोले , "ओंम भाई केम छो ? वडोदरा मे सब कुछ ठीक है न? " मैंने अभिवादन के साथ उनसे बातचीत प्रारंभ की और एक प्रश्न , जो पिछले कई दिनों से मन को बेचैन कर रहा था , उनके सामने रख दिया । मैंने कहा , "प्रधान मंत्री जी यह अमरीकी राष्ट्रपति हमारे आंतरिक मामलों में क्यों दखलअंदाजी करते हैं ? भारत छोडने से पहले भी उन्होंने भारत को धार्मिक सहिष्णुता का पाठ पढ़ाने की जुर्रत की थी , अब फिर एक बयान में उन्होंने भारत को इस मसले पर नसीहत दे डाली है । आपको नहीं लगता अमेरिका सारी हदें पार कर रहा है ?"
मोदी जी ने तुरंत हँसकर उत्तर दिया , " अरे नहीं ओंम भाई , मेरा और बराक का मजाक तो चलता रहता है , अब तुमसे क्या छुपाना , उस दिन भारत में चाय पर हुई आपसी बातचीत में मैंने भी उन्हें छेड़ दिया था कि अमेरिका में काले लोगों पर ज्यादती होने के समाचार क्यों आते रहते हैं ?" मजाक की बात थी , बराक ने भी मजाक में जवाब दिया -अरे मैं भी तो काला हूं कभी कभी मुझ पर भी होती है तुम्हारी भाभी की तरफ़ से । हा हा हा - तो हमारा ऐसा हंसी मजाक बिल्कुल नई बात नहीं है । कई दिन हो गए हैं उन्हें भारत से गए हुए । मुझसे फिर मसख्ररी करने का मन हुआ होगा , तो यह मजाक शुरु कर दिया । अब बराक की बातें क्या बताऊं , बडा ही मजाकिया स्वभाव पाया है ।" और तभी पत्नी की "चाय लीजिए " की आवाज के साथ आँख खुल गई ।
यह चाय भी अजीब चीज है किसी के तो प्रधान मंत्री बनने के सपने तक पूरे कर देती है और किसी के प्रधान मंत्री से हो रही बातचीत तक के सपने तोड़ देती है ।
ओंम प्रकाश नौटियाल, बडौदा , मोबा.9427345810
आज सुबह के वक्त स्वप्न में प्रधान मंत्री मोदी जी से मुलाकात हो गई । मोदी जी ने भी मानों मुझे एकदम पहचान लिया और देखते ही बोले , "ओंम भाई केम छो ? वडोदरा मे सब कुछ ठीक है न? " मैंने अभिवादन के साथ उनसे बातचीत प्रारंभ की और एक प्रश्न , जो पिछले कई दिनों से मन को बेचैन कर रहा था , उनके सामने रख दिया । मैंने कहा , "प्रधान मंत्री जी यह अमरीकी राष्ट्रपति हमारे आंतरिक मामलों में क्यों दखलअंदाजी करते हैं ? भारत छोडने से पहले भी उन्होंने भारत को धार्मिक सहिष्णुता का पाठ पढ़ाने की जुर्रत की थी , अब फिर एक बयान में उन्होंने भारत को इस मसले पर नसीहत दे डाली है । आपको नहीं लगता अमेरिका सारी हदें पार कर रहा है ?"
मोदी जी ने तुरंत हँसकर उत्तर दिया , " अरे नहीं ओंम भाई , मेरा और बराक का मजाक तो चलता रहता है , अब तुमसे क्या छुपाना , उस दिन भारत में चाय पर हुई आपसी बातचीत में मैंने भी उन्हें छेड़ दिया था कि अमेरिका में काले लोगों पर ज्यादती होने के समाचार क्यों आते रहते हैं ?" मजाक की बात थी , बराक ने भी मजाक में जवाब दिया -अरे मैं भी तो काला हूं कभी कभी मुझ पर भी होती है तुम्हारी भाभी की तरफ़ से । हा हा हा - तो हमारा ऐसा हंसी मजाक बिल्कुल नई बात नहीं है । कई दिन हो गए हैं उन्हें भारत से गए हुए । मुझसे फिर मसख्ररी करने का मन हुआ होगा , तो यह मजाक शुरु कर दिया । अब बराक की बातें क्या बताऊं , बडा ही मजाकिया स्वभाव पाया है ।" और तभी पत्नी की "चाय लीजिए " की आवाज के साथ आँख खुल गई ।
यह चाय भी अजीब चीज है किसी के तो प्रधान मंत्री बनने के सपने तक पूरे कर देती है और किसी के प्रधान मंत्री से हो रही बातचीत तक के सपने तोड़ देती है ।
ओंम प्रकाश नौटियाल, बडौदा , मोबा.9427345810
Friday, February 6, 2015
Friday, January 30, 2015
Thursday, January 29, 2015
Saturday, January 24, 2015
Tuesday, January 20, 2015
Sunday, January 18, 2015
Thursday, January 8, 2015
Tuesday, January 6, 2015
Monday, January 5, 2015
Thursday, January 1, 2015
Wednesday, December 31, 2014
Sunday, December 21, 2014
Friday, December 19, 2014
अहम रोकता है
-ओंम प्रकाश नौटियाल
मुहब्बत जब बेशुमार होती है,
नाहक ही तब तकरार होती है,
अहम रोकता है सुलह करने से
जीत व हार सर सवार होती है!
-ओंम प्रकाश नौटियाल
मुहब्बत जब बेशुमार होती है,
नाहक ही तब तकरार होती है,
अहम रोकता है सुलह करने से
जीत व हार सर सवार होती है!
-ओंम प्रकाश नौटियाल
Wednesday, December 17, 2014
Monday, December 15, 2014
भाग्य
ओंम प्रकाश नौटियाल
कब हमने कहा था कि तोड़ तारे लायेंगे
पतझड़ के मौसम में हम बहारे लायेंगे
है डूबना मझधार में यदि भाग्य तुम्हारा
हम कैसे वहाँ पर भला किनारे लायेंगे?
-ओंम प्रकाश नौटियाल
कब हमने कहा था कि तोड़ तारे लायेंगे
पतझड़ के मौसम में हम बहारे लायेंगे
है डूबना मझधार में यदि भाग्य तुम्हारा
हम कैसे वहाँ पर भला किनारे लायेंगे?
-ओंम प्रकाश नौटियाल
Friday, December 12, 2014
Thursday, December 11, 2014
Thursday, December 4, 2014
Wednesday, December 3, 2014
प्रेम
-ओंम प्रकाश नौटियाल
बात प्रेम की आए तो हँसकर टाल देता है,
मगर गीतों पर मेरे झूमकर ताल देता है,
अपने रंग में हौले हौले रंग लिया ऐसा
बस अब चैन मुझको उसका ही खयाल देता है !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
बात प्रेम की आए तो हँसकर टाल देता है,
मगर गीतों पर मेरे झूमकर ताल देता है,
अपने रंग में हौले हौले रंग लिया ऐसा
बस अब चैन मुझको उसका ही खयाल देता है !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
Saturday, November 29, 2014
Thursday, November 27, 2014
Tuesday, November 25, 2014
जीवन
-ओंम प्रकाश नौटियाल
रात दिवस का चक्र, जीना तमाशा हो गया,
धूप कभी खिलती , कभी चौमासा हो गया,
जिन्दगी की राथों में, सुख दुख दोनों मिले
मन खुशी से तोला ,गम से माशा हो गया !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
रात दिवस का चक्र, जीना तमाशा हो गया,
धूप कभी खिलती , कभी चौमासा हो गया,
जिन्दगी की राथों में, सुख दुख दोनों मिले
मन खुशी से तोला ,गम से माशा हो गया !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
Saturday, November 22, 2014
Friday, November 21, 2014
Tuesday, November 18, 2014
Tuesday, November 11, 2014
क्या करें ?
ओंम प्रकाश नौटियाल
प्रश्न यही गूंजता है क्या करें,
काम नहीं सूझता है क्या करें,
राम भरोसे भला कब तक रहें
आज युवा पूछता है क्या करें !
--ओंम प्रकाश नौटियाल
प्रश्न यही गूंजता है क्या करें,
काम नहीं सूझता है क्या करें,
राम भरोसे भला कब तक रहें
आज युवा पूछता है क्या करें !
--ओंम प्रकाश नौटियाल
Sunday, November 9, 2014
गंगा कैसे सा्फ़ हो
-ओंम प्रकाश नौटियाल
गंगा कैसे सा्फ़ हो , रहता प्रश्न कचोट,
इसे मलिन ही हम करें , श्रद्धा में है खोट,
श्रद्धा में है खोट , दूर किस तरह हो रोग
कल कीचड़, मल, मैल, मिलाते हर क्षण लोग !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
गंगा कैसे सा्फ़ हो , रहता प्रश्न कचोट,
इसे मलिन ही हम करें , श्रद्धा में है खोट,
श्रद्धा में है खोट , दूर किस तरह हो रोग
कल कीचड़, मल, मैल, मिलाते हर क्षण लोग !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
Saturday, November 8, 2014
Monday, November 3, 2014
Sunday, November 2, 2014
Saturday, November 1, 2014
Monday, October 27, 2014
Friday, October 24, 2014
Wednesday, October 22, 2014
Monday, October 13, 2014
Friday, October 10, 2014
कैलाश सत्यार्थी जी को नोबल शान्ति पुरस्कार जीतने पर हार्दिक बधाई ! नोबल से पहले 11 विदेशी पुरस्कार भारत में पद्मश्री भी नहीं !!!
-
हममें से अधिकतर लोगों ने कैलाश सत्यार्थी जी का नाम शायद पाकिस्तान में जन्मी सामाजिक कार्यकर्ता 17 वर्षीय मलाला यूसुफजई के साथ उन्हें संयुक्त रूप से वर्ष 2014 का नोबल शान्ति पुरस्कार मिलने की घोषणा होने के बाद (कल 09.10.2014 को ) सुना होगा । मदर टैरेसा के बाद नोबल शान्ति पुरस्कार पाने वाले वह दूसरे भारतीय हैं ।
कैलाश सत्यार्थी जी का जन्म विदिशा , मध्य प्रदेश में 11 जनवरी 1954 को हुआ था । कैलाश जी आजकल अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहते हैं । 26 वर्ष की उम्र में उन्होंने इलैक्ट्रिकल इंजीनियर का पेशा छोड़ दिया और बच्चों के अधिकारों के लिए कार्य करना शुरु कर दिया । गाँधीवादी परम्परा के सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने बचपन बचाओ संस्था की स्थापना की और वह इसके अध्यक्ष हैं । इनकी संस्था मे लगभग एक लाख स्वयंसेवक है और यह संस्था अब तक लगभग इतने ही असहाय , निराश्रित बच्चों की जिंदगी को बाल श्रम से मुक्ति दिलाकर तथा उनकी शिक्षा व पुनर्वास की व्यवस्था कर उसमें सकारात्मक बदलाव लाने का काम कर चुकी है । लगभग तीन दशक से भी अधिक समय से कैलाश जी बाल मजदूरी के विरुद्ध और बाल शिक्षा के लिए संघर्षरत हैं और वह अपने आंदोलन को सबके लिए शिक्षा से जोडकर यूनैस्को द्वारा चलाये जा रहे सर्व शिक्षा अभियान से भी जुड़ हुए हैं। उन्होंने बाल श्रम और बाल शिक्षा के लिए देश विदेश में बने कानूनों में आवश्यक संशोधन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं । वह बच्चों के लिए कार्यरत अनेकों अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से भी सक्रिय रूप से जुड़े हैं जिनमें इंटरनैशनल सेंटर ऑन चाइल्ड लेबर ऐंड एजुकेशन व ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर प्रमुख हैं ।
सत्यार्थी जी के विषय में विदेशों में बहुत से टीवी शो ,डाक्यूमैन्टरी आदि दिखाई जाती रही है । उनको विदेशों में अब तक ललगभग 11 पुरस्कार मिल चुके हैं किंतु विड़म्बना यह है कि भारत में उन्हे अब तक पद्मश्री भी नही मिली है। हमारे देश में पद्म पुरस्कारों को केवल सांसद प्रस्तावित कर सकते है । राजनीति से दूर रहने वाले , सच्चे और समर्पित समाज सेवक , स्वाभिमानी सत्यार्थी जी में इसीलिए राजनीतिज्ञों को शायद कोई पुरस्कार से नवाजने योग्य बात दिखाई ही नही दी ।
जिस व्यक्ति को 11 मुल्कों की पुलिस ढूंढ रही हो उसे किसी भारतीय पुरस्कार के मिलने की फिर भी संभावना है पर खेद की बात है कि जिस सत्यार्थी को 11 देशों ने पुरस्कृत किया हो उसका अब तक भारतीय पुरस्कार सूचि में कहीं नाम नहीं ।
स्वार्थ की राजनीति के ’हुदहुद’ में सत्यार्थी जी के नोबल पुरस्कार जीतने का समाचार ताजा बयार की तरह है । सत्यार्थी जी , उनके परिवार और समस्त देशवासियॊ को उनकी इस बेजोड़ उपलब्धि पर हार्दिक बधाई । हमें गर्व है आप पर ! आप सच्चे "भारत रत्न" हैं !!
जय भारत ।
-ओंम प्रकाश नौटियाल, बडौदा ,गुजरात ,मोबा. 9427345810
हममें से अधिकतर लोगों ने कैलाश सत्यार्थी जी का नाम शायद पाकिस्तान में जन्मी सामाजिक कार्यकर्ता 17 वर्षीय मलाला यूसुफजई के साथ उन्हें संयुक्त रूप से वर्ष 2014 का नोबल शान्ति पुरस्कार मिलने की घोषणा होने के बाद (कल 09.10.2014 को ) सुना होगा । मदर टैरेसा के बाद नोबल शान्ति पुरस्कार पाने वाले वह दूसरे भारतीय हैं ।
कैलाश सत्यार्थी जी का जन्म विदिशा , मध्य प्रदेश में 11 जनवरी 1954 को हुआ था । कैलाश जी आजकल अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहते हैं । 26 वर्ष की उम्र में उन्होंने इलैक्ट्रिकल इंजीनियर का पेशा छोड़ दिया और बच्चों के अधिकारों के लिए कार्य करना शुरु कर दिया । गाँधीवादी परम्परा के सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने बचपन बचाओ संस्था की स्थापना की और वह इसके अध्यक्ष हैं । इनकी संस्था मे लगभग एक लाख स्वयंसेवक है और यह संस्था अब तक लगभग इतने ही असहाय , निराश्रित बच्चों की जिंदगी को बाल श्रम से मुक्ति दिलाकर तथा उनकी शिक्षा व पुनर्वास की व्यवस्था कर उसमें सकारात्मक बदलाव लाने का काम कर चुकी है । लगभग तीन दशक से भी अधिक समय से कैलाश जी बाल मजदूरी के विरुद्ध और बाल शिक्षा के लिए संघर्षरत हैं और वह अपने आंदोलन को सबके लिए शिक्षा से जोडकर यूनैस्को द्वारा चलाये जा रहे सर्व शिक्षा अभियान से भी जुड़ हुए हैं। उन्होंने बाल श्रम और बाल शिक्षा के लिए देश विदेश में बने कानूनों में आवश्यक संशोधन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं । वह बच्चों के लिए कार्यरत अनेकों अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से भी सक्रिय रूप से जुड़े हैं जिनमें इंटरनैशनल सेंटर ऑन चाइल्ड लेबर ऐंड एजुकेशन व ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर प्रमुख हैं ।
सत्यार्थी जी के विषय में विदेशों में बहुत से टीवी शो ,डाक्यूमैन्टरी आदि दिखाई जाती रही है । उनको विदेशों में अब तक ललगभग 11 पुरस्कार मिल चुके हैं किंतु विड़म्बना यह है कि भारत में उन्हे अब तक पद्मश्री भी नही मिली है। हमारे देश में पद्म पुरस्कारों को केवल सांसद प्रस्तावित कर सकते है । राजनीति से दूर रहने वाले , सच्चे और समर्पित समाज सेवक , स्वाभिमानी सत्यार्थी जी में इसीलिए राजनीतिज्ञों को शायद कोई पुरस्कार से नवाजने योग्य बात दिखाई ही नही दी ।
जिस व्यक्ति को 11 मुल्कों की पुलिस ढूंढ रही हो उसे किसी भारतीय पुरस्कार के मिलने की फिर भी संभावना है पर खेद की बात है कि जिस सत्यार्थी को 11 देशों ने पुरस्कृत किया हो उसका अब तक भारतीय पुरस्कार सूचि में कहीं नाम नहीं ।
स्वार्थ की राजनीति के ’हुदहुद’ में सत्यार्थी जी के नोबल पुरस्कार जीतने का समाचार ताजा बयार की तरह है । सत्यार्थी जी , उनके परिवार और समस्त देशवासियॊ को उनकी इस बेजोड़ उपलब्धि पर हार्दिक बधाई । हमें गर्व है आप पर ! आप सच्चे "भारत रत्न" हैं !!
जय भारत ।
-ओंम प्रकाश नौटियाल, बडौदा ,गुजरात ,मोबा. 9427345810
Wednesday, October 8, 2014
Tuesday, October 7, 2014
फर्ज की पुकार
ओंम प्रकाश नौ्टियाल
फर्ज की यही पुकार है चले आइये,
हो रहा अत्याचार है चले आइये,
जो खड़ी है मुल्क की एकता के मध्य
गिरानी वह दीवार है चले आइये !!
-ओंम प्रकाश नौ्टियाल
फर्ज की यही पुकार है चले आइये,
हो रहा अत्याचार है चले आइये,
जो खड़ी है मुल्क की एकता के मध्य
गिरानी वह दीवार है चले आइये !!
-ओंम प्रकाश नौ्टियाल
Monday, September 29, 2014
Sunday, September 28, 2014
Tuesday, September 23, 2014
Sunday, September 21, 2014
Saturday, September 20, 2014
नियम और वीआईपी - 36 का आँकड़ा
-ओंम प्रकाश नौटियाल
आज (20-09-2014) प्रकाशित एक समाचार के अनुसार भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी अपनी चेन्नई सुपरकिंग की टीम के सदस्यों को लेकर हैदराबाद का एक पाँच सितारा होटल इसलिए छोडकर चले गए क्योंकि होटल के प्रबंधकों ने होटल के नियमों का पालन करते हुए उन्हें बोर्ड रूम में बाहर से आई बिरयानी खाने की इजाजत नहीं दी । उनके लिए यह बिरयानी, चैंम्पियन लीग ट्वैंटी के उदघाटन मुकाबले से एक दिन पूर्व , हैदराबाद के भारतीय बल्लेबाज अम्बाती रायुडु के घर से भेजी गई थी जो स्वयं उस दिन मुम्बई की ओर से रायपुर में मैच खेल रहे थे ।
होटल ने अपने नियमों में कुछ नरमी बरतते हुए खिलाडियों को उनके कमरों में खाने की इजाजत तो दे थी किंतु बोर्डरूम में ही खाने की उनकी माँग को द्दढ़ता से अस्वीकार कर दिया । धोनी बोर्डरूम में ही खाने की अपनी जिद पर कायम रहे और मना किए जाने पर अपनी बुकिंग निरस्त कर अन्य खिलाडियों को लेकर हैदराबाद के दूसरे होटल में चले गए । बीसीसीआई के एक अधिकारी ने होटल बदलने की बात की यह कहकर पुष्टि की कि वह वहाँ रहने में प्रसन्न नहीं थे।
धोनी करोडों युवाओं के रोल मौडल है जो उनसे प्रेरणा लेते हैं , सीख लेते हैं और उनके पदचिन्हों पर चलने के स्वप्न भी देखते हैं और प्रयास करते हैं इसलिए उनके द्वारा किया गया ऐसा आचरण ( यदि होटल छोड़ने का यही कारण है ,वैसे इस कारण को अब तक किसी ने भी नकारा नहीं है ) अत्यंत निंदनीय है । होटल ने व्यवस्थागत कारणों से अगर कुछ नियम बनाये हैं ,जो संविधान सम्मत हैं, तो उनका सहर्ष पालन होना चाहिए । अपने लिए नियमों को बदलवाने की जिद का एकमात्र आधार यही लगता है कि हम वीवीआईपी हैं और आपके नियम हमारे लिए बेमानी हैं यानि हम सब नियमों से उपर हैं ।उन्हें तो होटल प्रबंधन की प्रशंसा करनी चाहिए थी कि वह उनके हैसियत और रूतबे से बेपरवाह होकर नियमों का पालन करवाने के लिए इतने सजग थे । यदि वीवीआईपी लोगों को नियम तोडने पर पकडने वाले साहसी कार्यकर्ताओं को इस देश में पुरस्कृत किया जाने लगे तो देश तुरंत ही सकारात्मक बदलाव की दिशा में चल पडेगा । अभी तो यह होता आ रहा है कि अगर वीवीआईपी के किसी करीबी का भी कोई पुलिस वाला चालान करने का दुस्साहस कर ले तो पूरे महकमे पर खतरे के बादल मंडराने लगते हैं । इसीलिए वीआईपी दिखने के लिए लालबत्ती की इतनी माँग है ।
-ओंम प्रकाश नौटियालश्रंगार न होगा भाषण से सत्कार न होगा शासन से
-ओंम प्रकाश नौटियाल
हिन्दी का विकास , प्रचार, प्रसार पिछले वर्षों में बहुत अधिक हुआ है किंतु हाँ, मैं इस बात से सहमत हूं कि इसमें हिंदी दिवस या हिन्दी पखवाडों का योगदान लगभग नगण्य है । इस कार्य में हिन्दी फिल्मों , टीवी सीरियल्स आदि ने अहम भूमिका अदा की है ,आधुनिक तकनीक ने इनकी पहुँच को विश्वभर के देशों मे अत्यंत सुगम बना दिया है ।125 करोड़ आबादी वाले भारत देश को एक बडे बाजार के रूप में देखने वाले विश्व के अनेक देश यहाँ अपनी पैठ जमाने के लिए हिन्दी सीख रहे हैं ।
फ़ेसबुक और अन्य सोशल साइट्स का भी हिन्दी साहित्य के प्रचार प्रसार में बडा योगदान है । हमारे देश के अंदर भी रोजगार के कारण युवाओं का अपना गाँव/नगर छोड देश के अन्य हिस्सों में जाने से भी देश भर में हिन्दी की स्वीकार्यता बहुत अधिक बढी है । विश्व के करोडों लोगों की इस भाषा को पल्लवित और प्रसारित होने से कोई नहीं रोक सकता । सरकारी कार्यालयो में भी हिन्दी के निरंतर बढते प्रेमियों के बाहरी दबाव के कारण ही हिन्दी पूरी तरह से छायेगी, इन "हिन्दी दिवसों " या पखवाडो से नहीं जो कभी से प्रति वर्षरस्म अदायगी के तौर पर ऐसे आयोजनों पर दिल खोल कर खर्च कर अपनी पीठ थपथपाते चले आ रहे हैं । हिन्दी का भविष्य अत्यंत उज्जवल है, निश्चिंत रहिए ।प्रतिष्ठित हिन्दी कवि श्री गोपाल सिंह नेपाली जी की दशकों पहले लिखी
कविता के अंश उद्धत कर रहा हूं :
" हिन्दी है भारत की भाषा तो अपने आप पनपने दो
यह दुखड़ों का जंजाल नहीं लाखों मुखड़ों की भाषा है
थी अमर शहीदों की आशा अब जिन्दों की अभिलाषा है
मेवा है इसकी सेवा में नयनों को कभी न झुकने दो
हिन्दी है भारत की भाषा......
श्रंगार न होगा भाषण से सत्कार न होगा शासन से
यह सरस्वती है जनता की पूजो उतरो सिंहासन से
तुम इसे शान्ति में लिखने दो, संघर्ष काल में तपने दो
हिन्दी है भारत की भाषा......
-गोपाल सिंह नेपाली "
जय भारत !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
वड़ोदरा , गुजरात
Thursday, September 18, 2014
Tuesday, September 16, 2014
भाषा प्यार की
ओंम प्रकाश नौटियाल
भाषा प्यार की एक नई ईजाद कर लूंगा
नज़रें मिला कर तुमसे मैं संवाद कर लूंगा
तुम्हारे हृदय में जो छुपा वह भी पढ़ा मैने
उन्हीं भावों से दिल अपना आबाद कर लूंगा
-ओंम प्रकाश नौटियाल
भाषा प्यार की एक नई ईजाद कर लूंगा
नज़रें मिला कर तुमसे मैं संवाद कर लूंगा
तुम्हारे हृदय में जो छुपा वह भी पढ़ा मैने
उन्हीं भावों से दिल अपना आबाद कर लूंगा
-ओंम प्रकाश नौटियाल
Sunday, September 14, 2014
Saturday, September 13, 2014
Wednesday, September 10, 2014
Tuesday, September 9, 2014
रंग महबूब का
-ओंम प्रकाश नौटियाल
इस तरह सदा न तुम यूं ऊब के देखा करो
दिल में कभी तो हमारे डूब के देखा करो
चाहते हैं हम तुम्हें इस जान से भी ज्यादा
रंग हममें भी कभी महबूब के देखा करो
-ओंम प्रकाश नौटियाल
इस तरह सदा न तुम यूं ऊब के देखा करो
दिल में कभी तो हमारे डूब के देखा करो
चाहते हैं हम तुम्हें इस जान से भी ज्यादा
रंग हममें भी कभी महबूब के देखा करो
-ओंम प्रकाश नौटियाल
Sunday, September 7, 2014
अनुनय विनय
-ओंम प्रकाश नौटियाल
मित्रों में केवल मिठास ही छनती नहीं सदा,
शत्रुओं में भी दिन रात ही ठनती नहीं सदा,
सख़्त भी होना पडता है अकसर कई बार
अनुनय विनय करके बात बनती नही सदा !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
मित्रों में केवल मिठास ही छनती नहीं सदा,
शत्रुओं में भी दिन रात ही ठनती नहीं सदा,
सख़्त भी होना पडता है अकसर कई बार
अनुनय विनय करके बात बनती नही सदा !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
Thursday, September 4, 2014
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